Popular:
अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 2 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 2 • मन्त्र 13

10.2.13

Mantra ID: 10.2.13

को अ॑स्मिन्प्रा॒णम॑वय॒त्को अ॑पा॒नं व्या॒नमु॑ । स॑मा॒नम॑स्मि॒न्को दे॒वोऽधि॑ शिश्राय॒ पूरु॑षे ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 10.2.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस पुरुष में प्राण, अपान एवं व्यान वायु को किस ने धारण किया? इस पुरुष में समान वायु को किस ने आश्रित किया? (१३)

EN English Translation

Who possessed the air of life, apana and vyana in this man? Who depended on the same air in this man? (13)

卐 HinduText AI