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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 4 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 4 • मन्त्र 10

10.4.10

Mantra ID: 10.4.10

अ॑घा॒श्वस्ये॒दं भे॑ष॒जमु॒भयो॑ स्व॒जस्य॑ च । इन्द्रो॒ मेऽहि॑मघा॒यन्त॒महिं॑ पै॒द्वो अ॑रन्धयत् ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.4.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मेरे पास जो जड़ीबूटियां हैं, वे अघाश्च और स्वज दोनों प्रकार के सर्पो का विष दूर करने वाली हैं. हिंसा रूपी पाप करने वाले सांप को रोकने के हेतु इंद्र ने पैद्ध को मेरे वश में किया है. (१०)

EN English Translation

The herbs I have are going to remove the venom of both aghascha and swaj snakes. Indra has subdued Padha to stop the snake that commits the sin of violence. (10)

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