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10.4.19
सं हि शी॒र्षाण्यग्र॑भं पौञ्जि॒ष्ठ इ॑व॒ कर्व॑रम् । सिन्धो॒र्मध्यं॑ प॒रेत्य॒ व्यनिज॒महे॑र्वि॒षम् ॥ (१९)
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अथर्ववेद मन्त्र 10.4.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
केवट जिस प्रकार पतवार को ग्रहण करता है, उसी प्रकार मैं ने सर्प शीश पकड़ लिए हैं. मैं ने सिंधु के मध्य भाग से लौट कर सर्प के विष को प्रभावहीन बना दिया है. (१९)
EN English Translation
Just as Kewat receives the hull, I have caught the snake head. I have returned from the central part of the Indus and made the snake venom ineffective. (19)