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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 5 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 5 • मन्त्र 10

10.5.10

Mantra ID: 10.5.10

वरु॑णस्य भा॒ग स्थ॑ । अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त । प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.5.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जलो! तुम वरुण के भाग हो. तुम जलों का वीर्य एवं दिव्य तेज हम में धारण करो. बुम लोक के कल्याण के लिए प्रजापति का तेज हम में स्थित हो. (१०)

EN English Translation

O burn! You are Varun's part. You should put the semen of water and divine glory in us. For the welfare of bum folk, prajapati's glory should be located in us. (10)

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