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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 6 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 6 • मन्त्र 2

10.6.2

Mantra ID: 10.6.2

वर्म॒ मह्य॑म॒यं म॒णिः फाला॑ज्जा॒तः क॑रिष्यति । पू॒र्णो म॒न्थेन॒ माग॑म॒द्रसे॑न स॒ह वर्च॑सा ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

फाल से उत्पन्न यह मणि मेरे लिए कवच बन कर रक्षा करेगी. मंथन की सामर्थ्य एवं रस बल से युक्त होने के कारण समर्थ यह मणि मेरे पास आई है. (२)

EN English Translation

This gem produced from fal will protect me by becoming a shield for me. Due to the power of churning and being equipped with juice power, this gem has come to me. (2)

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