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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 6 • Mantra 26

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 6 • मन्त्र 26

10.6.26

Mantra ID: 10.6.26

यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम् । स मा॒यं म॒णिराग॑मदू॒र्जया॒ पय॑सा स॒ह द्रवि॑णेन श्रि॒या स॒ह ॥ (२६)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति देव ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि ऊर्जा, दूध एवं शोभा के साथ मुझे प्राप्त हुई है. (२६)

EN English Translation

I have received the same gem with energy, milk and beauty, which Was tied by Brihaspati Dev in the hands of devas, which destroyed the asuras. (26)

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