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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 6 • Mantra 28

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 6 • मन्त्र 28

10.6.28

Mantra ID: 10.6.28

यमब॑ध्ना॒द्बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम् । स मा॒यं म॒णिराग॑म॒त्सर्वा॑भि॒र्भूति॑भिः स॒ह ॥ (२८)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने असुरों का विनाश करने वाली जिस मणि को देवों के हाथों में बांधा था, वही मणि मुझे समस्त विभूतियों के साथ प्राप्त हुई है. (२८)

EN English Translation

I have received the same gem with all the personalities, which Jupiter had tied in the hands of the gods, which destroyed the asuras. (28)

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