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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 6 • Mantra 34

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 6 • मन्त्र 34

10.6.34

Mantra ID: 10.6.34

यस्मै॑ त्वा यज्ञवर्धन॒ मणे॑ प्र॒त्यमु॑चं शि॒वम् । तं त्वं श॑तदक्षिण॒ मणे॑ श्रैष्ठ्याय जिन्वतात् ॥ (३४)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.6.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यज्ञ बढ़ाने वाली मणि! तू कल्याणकारिणी है. मैं तुझे जिस को बांधू, तू उस को श्रेष्ठता प्रदान कर. (३४)

EN English Translation

O gem that increases the yajna! You are kalyankarini. Give superiority to the one I bind you to. (34)

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