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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 13

10.7.13

Mantra ID: 10.7.13

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद्दे॒वा अङ्गे॒ सर्वे॑ स॒माहि॑ताः । स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस के अंग में सभी तैंतीस देव समाए हुए हैं, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१३)

EN English Translation

Tell me of the God in whose body all the thirty-three gods are encompassed, who is He? (13)

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