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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 19

10.7.19

Mantra ID: 10.7.19

यस्य॒ ब्रह्म॒ मुख॑मा॒हुर्जि॒ह्वां म॑धुक॒शामु॒त । वि॒राज॒मूधो॒ यस्या॒हुः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्रह्म जिस का मुख कहा गया है, मधुकशा जिस की जीभ बताई गई है एवं विराट्‌ ऐन कहा गया है, उस ब्रह्म के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१९)

EN English Translation

Brahman, whose face has been said, Madhukasha whose tongue has been told and Virat Ain has been said, tell me about that Brahman, who is he? (19)

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