Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
10.7.39
यस्मै॒ हस्ता॑भ्यां॒ पादा॑भ्यां वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ चक्षु॑षा । यस्मै॑ दे॒वाः सदा॑ ब॒लिं प्र॒यच्छ॑न्ति॒ विमि॒तेऽमि॑तं स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (३९)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 10.7.39 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस असीमित परमात्मा के लिए देवगण हाथों, पैरों, वाणी, कानों और आंखों के द्वारा सदा उपहार प्रदान करते हैं, उसी परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (३९)
EN English Translation
Tell us about the unlimited God for whom the gods always give gifts through hands, feet, speech, ears and eyes, who is he? (39)