Popular:
अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 6

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 6

10.7.6

Mantra ID: 10.7.6

क्व प्रेप्स॑न्ती युव॒ती विरू॑पे अहोरा॒त्रे द्र॑वतः संविदा॒ने । यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्यापः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 10.7.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

परस्पर विरोधी रूप वाले युवा दिन और युवती रात कहां जाने की इच्छा से एकमत हो कर जाते हैं. जल जहां जाने की इच्छा से चले आ रहे हैं, उसी परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (६)

EN English Translation

The young men with conflicting forms agree on where they want to go day and night. Tell us about the same God, where water is coming with the desire to go, who is He? (6)

卐 HinduText AI