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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 7 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 7 • मन्त्र 8

10.7.8

Mantra ID: 10.7.8

यत्प॑र॒मम॑व॒मं यच्च॑ मध्य॒मं प्र॒जाप॑तिः ससृ॒जे वि॒श्वरू॑पम् । किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॒ यन्न प्रावि॑श॒त्किय॒त्तद्ब॑भूव ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.7.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रजापति ने उत्तम, अधम और मध्यम के रूप में संसार की सभी वस्तुओं और प्राणियों को बनाया है. इस संसार के कितने पदार्थ प्रजापति में प्रवेश कर चुके हैं? जो प्रवेश नहीं करता, वह कौन है? (८)

EN English Translation

Prajapati has created all the things and creatures of the world as the best, the middle and the middle. How many substances of this world have entered Prajapati? Who is the one who does not enter? (8)

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