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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 9 • Mantra 14

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 9 • मन्त्र 14

10.9.14

Mantra ID: 10.9.14

यौ त॒ ओष्ठौ॒ ये नासि॑के॒ ये शृङ्गे॒ ये च॒ तेऽक्षि॑णी । आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑ ॥ (१४)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.9.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शतौदना गौ! तेरे जो दोनों होंठ, तेरी नाक, तेरे जो दोनों सींग तथा जो दोनों आंखें हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मधुर दूध एवं घी देते रहें. (१४)

EN English Translation

O Shataudana Gau! May your two lips, your nose, your two horns and your two eyes always give curd, sweet milk and ghee to your donor. (14)

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