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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 1

11.6.1

Mantra ID: 11.6.1

प्रा॒णाय॒ नमो॒ यस्य॒ सर्व॑मि॒दं वशे॑ । यो भू॒तः सर्व॑स्येश्व॒रो यस्मि॒न्त्सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम् ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस प्राण के लिए नमस्कार है, जिस के वश में यह समस्त चराचर जगत्‌ है. यह प्राण सब का ईश्वर है और इसी में सारा जगत्‌ स्थित है. (१)

EN English Translation

Salutations to this soul, under whose control this whole grazing world is. This soul is the God of all and in it the whole world is located. (1)

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