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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 17

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 17

11.6.17

Mantra ID: 11.6.17

य॒दा प्रा॒णो अ॒भ्यव॑र्षीद्व॒र्षेण॑ पृथि॒वीं म॒हीम् । ओष॑धयः॒ प्र जा॑य॒न्तेऽथो॒ याः काश्च॑ वी॒रुधः॑ ॥ (१७)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्राण जब वर्षा के रूप में विशाल पृथ्वी पर जल गिराता है, तभी जड़ीबूटियां, फसलें और जो भी वृक्ष हैं, वे सब उत्पन्न होते हैं. (१७)

EN English Translation

When prana drops water on the vast earth in the form of rain, only then herbs, crops and whatever trees are there, they are all produced. (17)

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