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अथर्ववेद

Kanda 11 • Sukta 6 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 11 • सूक्त 6 • मन्त्र 4

11.6.4

Mantra ID: 11.6.4

यत्प्रा॒ण ऋ॒तावाग॑तेऽभि॒क्रन्द॒त्योष॑धीः । सर्वं॑ त॒दा प्र मो॑दते॒ यत्किं च॒ भूम्या॒मधि॑ ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 11.6.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब प्राण अर्थात्‌ सूर्यात्मक देव वर्षा ऋतु आने पर फसलों को लक्ष्य कर के गर्जन करते हैं, तब भूमि पर जितने भी प्राणी हैं, वे सब प्रसन्न होते हैं. (४)

EN English Translation

When prana i.e. suryak dev roars by targeting the crops when the rainy season comes, then all the creatures on the ground are happy. (4)

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