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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 10

12.1.10

Mantra ID: 12.1.10

याम॒श्विना॒वमि॑मातां॒ विष्णु॒र्यस्यां॑ विचक्र॒मे । इन्द्रो॒ यां च॒क्र आ॒त्मने॑ऽनमि॒त्रां शची॒पतिः॑ । सा नो॒ भूमि॒र्वि सृ॑जतां मा॒ता पु॒त्राय॑ मे॒ पयः॑ ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अश्चिनीकुमारों ने जिस पृथ्वी का निर्माण किया, विष्णु ने जिस पर पराक्रम का प्रदर्शन किया तथा इंद्र ने जिस पृथ्वी को अपने अधीन कर के शत्रुओं से हीन कर दिया, वह पृथ्वी अपना सार रूप जल मुझे उसी प्रकार पिलाए, जिस प्रकार माता पुत्र को दूध पिलाती है. (१०)

EN English Translation

The earth that The Ashchinikumars built, the earth on which Vishnu displayed might and the earth on which Indra subjugated him and made it inferior to the enemies, that earth should feed me its essence water in the same way as the mother feeds the son. (10)

卐 HinduText AI