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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 15

12.1.15

Mantra ID: 12.1.15

त्वज्जा॒तास्त्वयि॑ चरन्ति॒ मर्त्या॒स्त्वं बि॑भर्षि द्वि॒पद॒स्त्वं चतु॑ष्पदः । तवे॒मे पृ॑थिवि॒ पञ्च॑ मान॒वा येभ्यो॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ मर्त्ये॑भ्य उ॒द्यन्त्सूर्यो॑ र॒श्मिभि॑रात॒नोति॑ ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पृथ्वी! जो प्राणी तुम्हारे ऊपर जन्म लेते हैं, वे तुम्हारे ही ऊपर भ्रमण करते है. तुम जिन चार पैरों वाले पशुओं तथा दो पैरों वाले मनुष्यों का पोषण करती हो, उन के लिए सूर्य अपनी किरणों के द्वारा जीवन पर्यंत अमृतमयी ज्योति फैलाता है. (१५)

EN English Translation

O earth! The beings who are born on you travel over you. For the four-legged animals and two-legged humans you nurture, the sun spreads the nectar light throughout its rays throughout its rays. (15)

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