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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 34

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 34

12.1.34

Mantra ID: 12.1.34

यच्छया॑नः प॒र्याव॑र्ते॒ दक्षि॑णं स॒ख्यम॒भि भू॑मे पा॒र्श्वम् । उ॒त्ता॒नास्त्वा॑ प्र॒तीचीं॒ यत्पृ॒ष्टीभि॑रधि॒शेम॑हे । मा हिं॑सी॒स्तत्र॑ नो भूमे॒ सर्व॑स्य प्रतिशीवरि ॥ (३४)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पृथ्वी! सोता हुआ मैं करवट लूं अथवा सीधा हो कर सोऊं, उस समय कोई मेरी हिंसा न करे. (३४)

EN English Translation

O earth! While sleeping, I turn or sleep straight, no one should violence me at that time. (34)

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