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12.1.41
यस्यां॒ गाय॑न्ति॒ नृत्य॑न्ति॒ भूम्यां॒ मर्त्या॒ व्यैलबाः । यु॒ध्यन्ते॒ यस्या॑माक्र॒न्दो यस्यां॒ वद॑ति दुन्दु॒भिः । सा नो॒ भूमिः॒ प्र णु॑दतां स॒पत्ना॑नसप॒त्नं मा॑ पृथि॒वी कृ॑णोतु ॥ (४१)
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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.41 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस पृथ्वी पर मनुष्य नाचते और गाते हैं, जिस पर रुदन होता है और दुंदुंभि बजती है, वह पृथ्वी मुझे शन्रुहीन बनाए. (४१)
EN English Translation
The earth on which men dance and sing, on which there is crying and the sun rings, that earth should make me peaceless. (41)