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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 43

12.1.43

Mantra ID: 12.1.43

यस्याः॒ पुरो॑ दे॒वकृ॑ताः॒ क्षेत्रे॒ यस्या॑ विकु॒र्वते॑ । प्र॒जाप॑तिः पृथि॒वीं वि॒श्वग॑र्भा॒माशा॑माशां॒ रण्यां॑ नः कृणोतु ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवताओं द्वारा बनाए गए हिंसक पशु जिस पृथ्वी पर अनेक प्रकार की क्रीड़ाएं करते हैं, जो पूरे संसार को अपने में धारण करती है, उस पृथ्वी की दिशाओं को प्रजापति हमारे लिए मंगलमय करें. (४३)

EN English Translation

May Prajapati bless us with the directions of the earth on which violent animals made by the gods perform many types of sports, which holds the whole world in themselves. (43)

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