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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 56

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 56

12.1.56

Mantra ID: 12.1.56

ये ग्रामा॒ यदर॑ण्यं॒ याः स॒भा अधि॒ भूम्या॑म् । ये सं॑ग्रा॒माः समि॑तय॒स्तेषु॒ चारु॑ वदेम ते ॥ (५६)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.56 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पृथ्वी पर जो गांव, जंगल और सभाएं हैं, जो युद्ध की मत्रंणाएं हैं तथा जो युद्ध होते हैं, हे भूमि! हम उन सब में तेरी वंदना करते हैं. (५६)

EN English Translation

The villages, forests and meetings on earth, which are the fountains of war and the wars that take place, O land! We worship you in all of them. (56)

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