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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 1 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 1 • मन्त्र 7

12.1.7

Mantra ID: 12.1.7

यां रक्ष॑न्त्यस्व॒प्ना वि॑श्व॒दानीं॑ दे॒वा भूमिं॑ पृथि॒वीमप्र॑मादम् । सा नो॒ मधु॑ प्रि॒यं दु॑हा॒मथो॑ उक्षतु॒ वर्च॑सा ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.1.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवगण जाग्रत रहते हुए अथवा सावधान रहते हुए जिस पृथ्वी की रक्षा करते हैं, वह पृथ्वी हमें मधु, धन एवं बल से युक्त करे. (७)

EN English Translation

May the earth that the devas protect while awake or careful, may the earth contain us with honey, wealth and strength. (7)

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