Popular:
अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 5 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 5 • मन्त्र 3

12.5.3

Mantra ID: 12.5.3

स्व॒धया॒ परि॑हिता श्र॒द्धया॒ पर्यू॑ढा दी॒क्षया॑ गु॒प्ता य॒ज्ञे प्रति॑ष्ठिता लो॒को नि॒धन॑म् ॥ (३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 12.5.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह धेनु श्रद्धा से व्याप्त, स्वधा से युक्त और दीक्षा के द्वारा रक्षित है. यह मन से प्रतिष्ठित है. क्षत्रिय का इस की ओर दृष्टि डालना मृत्यु के समान है. (३)

EN English Translation

This dhenu is pervaded with reverence, full of swadha and protected by initiation. It is distinguished by mind. The Kshatriya's look at it is like death. (3)

卐 HinduText AI