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अथर्ववेद

Kanda 16 • Sukta 4 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 16 • सूक्त 4 • मन्त्र 5

16.4.5

Mantra ID: 16.4.5

प्राणा॑पानौ॒ मामा॑ हासिष्टं॒ मा जने॒ प्र मे॑षि ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 16.4.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्राण और अपान वायु मेरा त्याग न करें. मैं सदा प्रसन्न रहूं. (५)

EN English Translation

Do not give up my life and your air. May I always be happy. (5)

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