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अथर्ववेद

Kanda 16 • Sukta 7 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 16 • सूक्त 7 • मन्त्र 5

16.7.5

Mantra ID: 16.7.5

योस्मान्द्वेष्टि॒ तमा॒त्मा द्वे॑ष्टु॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः स आ॒त्मानं॑ द्वेष्टु ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 16.7.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो हम से द्वेष करता हो, उस से आत्मा द्वेष करे. जिस से हम द्वेष करते हैं, वह आत्मा सेद्वेष करे. (५)

EN English Translation

The soul should hate the one who hates us. The one we hate should hate the soul. (5)

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