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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 28 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 28 • मन्त्र 10

19.28.10

Mantra ID: 19.28.10

विध्य॑ दर्भ स॒पत्ना॑न्मे॒ विध्य॑ मे पृतनाय॒तः । विध्य॑ मे॒ सर्वा॑न्दु॒र्हार्दो॒ विध्य॑ मे द्विष॒तो म॑णे ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.28.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दर्भमणि! मेरे शत्रुओं को तथा मेरे विरुद्ध सेना एकत्र करने वालों को ताड़ित करो. जो मेरे प्रति दुर्भावना रखते हैं तथा जो मेरे द्वेषी हैं, तुम उन की ताड़ना करो. (१०)

EN English Translation

O darbhamani! Chastise my enemies and those who gather armies against me. Chastise those who have ill will towards Me and those who are hostile to Me. (10)

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