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अथर्ववेद

Kanda 19 • Sukta 45 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 19 • सूक्त 45 • मन्त्र 4

19.45.4

Mantra ID: 19.45.4

चतु॑र्वीरं बध्यत॒ आञ्ज॑नं ते॒ सर्वा॒ दिशो॒ अभ॑यास्ते भवन्तु । ध्रु॒वस्ति॑ष्ठासि सवि॒तेव॒ चार्य॑ इ॒मा विशो॑ अ॒भि ह॑रन्तु ते ब॒लिम् ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 19.45.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे आस्तृत मणि! मैं तुम्हें इंद्र के कवच से आच्छादित करता हूं. वे इंद्र देवों के राजा हुए. सभी देव तुझे अपने कार्यों की सिद्धि के लिए अपनेअपने कवचों से आच्छादित करें. हे आस्तृत मणि! सब देव तुम्हारी रक्षा करें. (४)

EN English Translation

O eternal gem! I cover you with Indra's armor. He became the king of Indra Devas. May all gods cover you with their own armor for the accomplishment of their tasks. O eternal gem! May all gods protect you. (4)

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