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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 20

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2

Kanda 2 • Sukta 20

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Mantra 2.20.1

वायो॒ यत्ते॒ तप॒स्तेन॒ तं प्रति॑ तप॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (१)

हि हिन्दी अनुवाद

हे वायु देव! तुम्हारी जो संताप पहुंचाने की शक्ति है, उस से उन्हें संताप पहुंचाओ जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (१)

EN English Translation

O Vayu Dev! With the power to spread your anger, anger those who hate us or those we hate. (1)

Mantra 2.20.2

वायो॒ यत्ते॒ हर॒स्तेन॒ तं प्रति॑ हर॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (२)

हि हिन्दी अनुवाद

हे वायु देव! तुम्हारी जो छीनने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के प्रति करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (२)

EN English Translation

O Vayu Dev! Use the power to take away from you towards those who hate us or those we hate. (2)

Mantra 2.20.3

वायो॒ यत्ते॒ ऽर्चिस्तेन॒ तं प्रत्य॑र्च॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (३)

हि हिन्दी अनुवाद

हे वायु देव! तुम्हारा जो वेग है, उस का प्रयोग उन के प्रति करो जो हम से द्वेष रखते हैं अथवा हम जिन से द्वेष रखते हैं. (३)

EN English Translation

O God of air! Use your speed towards those who hate us or those we hate. (3)

Mantra 2.20.4

वायो॒ यत्ते॑ शो॒चिस्तेन॒ तं प्रति॑ शोच॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (४)

हि हिन्दी अनुवाद

हे वायु देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोक मग्न करने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के प्रति करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)

EN English Translation

O Vayu Dev! Use your power to grieve others against those who hate us or those we hate. (4)

Mantra 2.20.5

वायो॒ यत्ते॒ तेज॒स्तेन॒ तम॑ते॒जसं॑ कृणु॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (५)

हि हिन्दी अनुवाद

हे वायु देव! तुम्हारा जो तेज है, उस के द्वारा उन्हें तेजहीन बनाओ, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५)

EN English Translation

O Vayu Dev! Make those who hate us or those we hate without a sharp one by yours. (5)

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