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2.29.6
शि॒वाभि॑ष्टे॒ हृद॑यं तर्पयाम्यनमी॒वो मो॑दिषीष्ठाः सु॒वर्चाः॑ । स॑वा॒सिनौ॑ पिबतां म॒न्थमे॒तम॒श्विनो॑ रू॒पं प॑रि॒धाय॑ मा॒याम् ॥ (६)
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अथर्ववेद मन्त्र 2.29.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे प्यासे पुरुष! मैं तेरे नीरस हृदय को सुखकारी जलों से तृप्त करता हूं. इस के पश्चात तू रोग रहित, उत्तम तेज युक्त एवं प्रसन्न हो जाएगा. एक मत धारण करने वाले अश्विनीकुमार मायारूप बना कर इस सत्तू को पीने के लिए शक्ति तैयार करें. (६)
EN English Translation
O thirsty man! I satisfy your dull heart with pleasant waters. After this, you will be disease-free, well-radiant and happy. Ashwinikumar, who holds one opinion, should make mayarup and prepare power to drink this sattu. (6)