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2.34.1
य ईशे॑ पशु॒पतिः॑ पशू॒नां चतु॑ष्पदामु॒त यो द्वि॒पदा॑म् । निष्क्री॑तः॒ स य॒ज्ञियं॑ भा॒गमे॑तु रा॒यस्पोषा॒ यज॑मानं सचन्ताम् ॥ (१)
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अथर्ववेद मन्त्र 2.34.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जो पशुपति रुद्र चार पैरों वाले पशुओं और दो पैरों वाले मनुष्यों के स्वामी हैं, उन के पास से प्राप्त किया हुआ यह यज्ञ के योग्य पशु यज्ञ का भाग बने एवं यजमान को धन की समृद्धियां प्राप्त हों. (१)
EN English Translation
Pashupati Rudra, who is the swami of four-legged animals and two-legged humans, should be part of the yagya and the host should get the prosperity of wealth. (1)