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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 7 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 7 • मन्त्र 3

2.7.3

Mantra ID: 2.7.3

दि॒वो मूल॒मव॑ततं पृथि॒व्या अध्युत्त॑तम् । तेन॑ स॒हस्र॑काण्डेन॒ परि॑ णः पाहि वि॒श्वतः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.7.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मणि! हमें स्वर्ग की जड़ के समान विस्तृत एवं पृथ्वी के ऊपर विस्तृत असीमित पाप से बचाओ और सभी प्रकार से हमारी रक्षा करो. (३)

EN English Translation

O gem! Save us from unlimited sin as wide as the root of heaven and wide on earth and protect us in all respects. (3)

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