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20.105.2
अनु॑ ते॒ शुष्मं॑ तु॒रय॑न्तमीयतुः क्षो॒णी शिशुं॒ न मा॒तरा॑ । विश्वा॑स्ते॒ स्पृधः॑ श्नथयन्त म॒न्यवे॑ वृ॒त्रं यदि॑न्द्र॒ तूर्व॑सि ॥ (२)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.105.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! तुम्हारे शीघ्रता करने वाले वञ्ज के पीछेपीछे आकाश और पृथ्वी उसी प्रकार जाते हैं, जिस प्रकार पिता और माता पुत्र के पीछेपीछे चलते हैं. जब तुम वृत्र राक्षस का नाश कर रहे थे, उस समय उस की द्वेष पूर्ण वृत्तियां तुम्हारे नाश की कामना कर रही थीं. (२)
EN English Translation
O Indra! The heavens and the earth follow your fast-moving creatures, just as father and mother follow the son. When you were destroying the demon Vritra, his malicious instincts were wishing for you to be destroyed. (2)