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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 107 • Mantra 13

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 107 • मन्त्र 13

20.107.13

Mantra ID: 20.107.13

चि॒त्रं दे॒वानां॑ के॒तुरनी॑कं॒ ज्योति॑ष्मान्प्र॒दिशः॒ सूर्य॑ उ॒द्यन् । दि॑वाक॒रोऽति॑ द्यु॒म्नैस्तमां॑सि॒ विश्वा॑तारीद्दुरि॒तानि॑ शु॒क्रः ॥ (१३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.107.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये किरणों वाले इंद्र सभी दिशाओं की ओर फैलाने वाले अपने प्रकाश से दिवस को प्रकट करते हैं तथा सभी अंधकारों और पापों से पार हो जाते हैं. (१३)

EN English Translation

Indra with these rays reveals the day with his light spreading towards all directions and overcomes all darkness and sins. (13)

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