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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 112 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 112 • मन्त्र 2

20.112.2

Mantra ID: 20.112.2

यद्वा॑ प्रवृद्ध सत्पते॒ न म॑रा॒ इति॒ मन्य॑से । उ॒तो तत्स॒त्यमित्तव॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.112.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम जिस की यह मृत्यु चाहते हो, यह कामना सत्य हो जाती है. (२)

EN English Translation

O Indra! The person whose death you want, this wish becomes true. (2)

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