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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 119 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 119 • मन्त्र 1

20.119.1

Mantra ID: 20.119.1

अस्ता॑वि॒ मन्म॑ पू॒र्व्यं ब्रह्मेन्द्रा॑य वोचत । पू॒र्वीरृ॒तस्य॑ बृह॒तीर॑नूषत स्तो॒तुर्मे॒धा अ॑सृक्षत ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.119.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! मैं ने प्राचीन स्तोत्र के द्वारा इंद्र की स्तुति की है. अब तुम भी यज्ञ की प्राचीन ऋचाओं से इन की स्तुति करो. स्तोताओं की बुद्धि मंत्रों से संपन्न हो गई है. (१)

EN English Translation

O Ritvijo! I have praised Indra through the ancient hymn. Now you also praise them with the ancient verses of yajna. The wisdom of the stotas has been endowed with mantras. (1)

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