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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 121 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 121 • मन्त्र 2

20.121.2

Mantra ID: 20.121.2

न त्वावाँ॑ अ॒न्यो दि॒व्यो न पार्थि॑वो॒ न जा॒तो न ज॑निष्यते । अ॑श्वा॒यन्तो॑ मघवन्निन्द्र वा॒जिनो॑ ग॒व्यन्त॑स्त्वा हवामहे ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.121.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! कोई भी पार्थिव और दिव्य प्राणी तुम्हारी समानता नहीं कर सकता. (२)

EN English Translation

O Indra! No earthly and divine being can match you. (2)

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