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20.126.1
वि हि सोतो॒रसृ॑क्षत॒ नेन्द्रं॑ दे॒वम॑मंसत । यत्राम॑दद्वृ॒षाक॑पिर॒र्यः पु॒ष्टेषु॒ मत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१)
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अथर्ववेद मन्त्र 20.126.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वृषाकपि देव ने इंद्र को देवता के समान समझा. वे वृषाकपि पुष्टयों के पालनकर्ता तथा मेरे मित्र हैं. हे इंद्र! इस कारण मैं उत्तम हूं. (१)
EN English Translation
Vrishakpi Dev considered Indra as a god. They are the sustainers of the test and my friends. O Indra! That's why I'm good. (1)