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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 126 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 126 • मन्त्र 18

20.126.18

Mantra ID: 20.126.18

अ॒यमि॑न्द्र वृ॒षाक॑पिः॒ पर॑स्वन्तं ह॒तं वि॑दत् । अ॒सिं सू॒नां नवं॑ च॒रुमादे॑ध॒स्यान॒ आचि॑तं॒ विश्व॑स्मादिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१८)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.126.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! वृषाकपि ने अपने समीप नष्ट हुए शत्रु के धन को प्राप्त किया. इस के अतिरिक्त असि, सूना तथा नवीन चरु को ग्रहण किया. वे इंदर सर्वश्रेष्ठ हैं. (१८)

EN English Translation

O Indra! Vrushakpi received the money of the enemy destroyed near him. Apart from this, he took asi, suna and new charu. Those inders are the best. (18)

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