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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 138 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 138 • मन्त्र 3

20.138.3

Mantra ID: 20.138.3

कण्वाः॒ इन्द्रं॒ यदक्र॑त॒ स्तोमै॑र्य॒ज्ञस्य॒ साध॑नम् । जा॒मि ब्रु॑वत॒ आयु॑धम् ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.138.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

कण्व ने अपने स्तोमों अर्थात्‌ मंत्रों के समूहों के द्वारा इंद्र के यज्ञ को पूर्ण किया. जामि उसी को आयुध कहती है. (३)

EN English Translation

Kanva completed indra's yajna through his stoms i.e. groups of mantras. Jami calls him ordnance. (3)

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