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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 141 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 141 • मन्त्र 5

20.141.5

Mantra ID: 20.141.5

यन्ना॑सत्या परा॒के अ॑र्वा॒के अस्ति॑ भेष॒जम् । तेन॑ नू॒नं वि॑म॒दाय॑ प्रचेतसा छ॒र्दिर्व॒त्साय॑ य॒च्छत॑म् ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.141.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! दूर की अथवा समीप की ओषधि को अपने दंभी मन के द्वारा हमें विशेष शक्ति के लिए प्रदान करो तथा हमारे शिशु के लिए घर दो. (५)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Give distant or near medicine to us with your conceited mind for special power and give a house for our baby. (5)

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