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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 21 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 21 • मन्त्र 9

20.21.9

Mantra ID: 20.21.9

त्वमे॒तां ज॑न॒राज्ञो॒ द्विर्दशा॑ब॒न्धुना॑ सु॒श्रव॑सोपज॒ग्मुषः॑ । ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑ नव॒तिं नव॑ श्रु॒तो नि च॒क्रेण॒ रथ्या॑ दु॒ष्पदा॑वृणक् ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.21.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम ने सहायक विहीन सुश्रवा राजा को घेरने वाले साठ हजार निन्यानवे सेनापतियों को अपने उस चक्र से नष्ट कर दिया जो रक्षा के योग्य था और जिसे शत्रु प्राप्त नहीं कर सकते थे. (९)

EN English Translation

O Indra! You destroyed the sixty-nine thousand generals who surrounded the assistantless King with your cycle that was worthy of defense and which the enemies could not achieve. (9)

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