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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 24 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 24 • मन्त्र 2

20.24.2

Mantra ID: 20.24.2

तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हि॒ष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम् । कु॒विन्न्वस्य तृ॒प्णवः॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.24.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! यह सोम कुशाओं पर रखा है. तुम इस की ओर आओ तथा इसे पी कर तृप्त बनो. (२)

EN English Translation

O Indra! It is placed on the Som Kushas. You come towards it and drink it and be satisfied. (2)

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