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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 33 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 33 • मन्त्र 3

20.33.3

Mantra ID: 20.33.3

ऊ॒ती श॑चीव॒स्तव॑ वी॒र्येण॒ वयो॒ दधा॑ना उ॒शिज॑ ऋत॒ज्ञाः । प्र॒जाव॑दिन्द्र॒ मनु॑षो दुरो॒णे त॒स्थुर्गृ॒णन्तः॑ सध॒माद्या॑सः ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.33.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे द्वारा पुत्र आदि रूप संतान तथा अन्न से युक्त सत्य के ज्ञाता तथा तुम्हें चाहने वाले ऋत्विज्‌ यजमान के घर में तुम्हारी स्तुति करते हुए बैठे. (३)

EN English Translation

O Indra! Your son, child and the knower of truth with food and those who love you, sit in the house of the Creator praising you. (3)

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