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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 37 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 37 • मन्त्र 9

20.37.9

Mantra ID: 20.37.9

स॒द्यश्चि॒न्नु ते॑ मघवन्न॒भिष्टौ॒ नरः॑ शंसन्त्युक्थ॒शास॑ उ॒क्था । ये ते॒ हवे॑भि॒र्वि प॒णीँरदा॑शन्न॒स्मान्वृ॑णीष्व॒ युज्या॑य॒ तस्मै॑ ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.37.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धन के स्वामी इंद्र! तुम्हारे आने के समय ऋत्विज्‌ उक्थ नाम के मंत्रों का उच्चारण करते हैं. जो ऋत्विज्‌ तुम्हारा आह्वान कर के यज्ञ न करने वालों को नष्ट करते हैं, वे भी उक्थ नाम के मंत्रों को बोलते हैं. उक्थों का उच्चारण करने वाले हम को तुम फल प्रदान करने के हेतु वरण करो. (९)

EN English Translation

O Swami of Wealth Indra! At the time of your arrival, they chant mantras named Ritvij uktha. Those who invoke you and destroy those who do not perform yajna also speak mantras called Ukth. Choose us who pronounce the ukthas to give you fruits. (9)

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