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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 43 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 43 • मन्त्र 2

20.43.2

Mantra ID: 20.43.2

यद्वी॒डावि॑न्द्र॒ यत्स्थि॒रे यत्पर्शा॑ने॒ परा॑भृतम् । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.43.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम हमें वह धन प्रदान करो जो स्थिर व्यक्ति के पास रहता है और जिसे बसनी अर्थात्‌ कमर में बांधी जाने वाली कपड़े की बनी लंबी थैली में भरा जाता है. (२)

EN English Translation

O Indra! You give us the money that lives with a stable person and which is filled in a long bag made of cloth tied in the waist. (2)

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