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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 45 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 45 • मन्त्र 2

20.45.2

Mantra ID: 20.45.2

स्तो॒त्रं रा॑धानां पते॒ गिर्वा॑हो वीर॒ यस्य॑ ते । विभू॑तिरस्तु सू॒नृता॑ ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.45.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धन के स्वामी इंद्र! तुम्हारा यह नाम सत्य हो. हमारी स्तुतियां तुम्हें हमारे पास लाने में समर्थ हैं. (२)

EN English Translation

O Swami of Wealth Indra! Your name is true. Our praises are able to bring you to us. (2)

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