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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 50 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 50 • मन्त्र 1

20.50.1

Mantra ID: 20.50.1

कन्नव्यो॑ अत॒सीनां॑ तु॒रो गृ॑णीत॒ मर्त्यः॑ । न॒ही न्व॑स्य महि॒मान॑मिन्द्रि॒यं स्वर्गृ॒णन्त॑ आन॒शुः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.50.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो इंद्र मरणशील मनुष्यों का आकार धारण करने वाले हैं, हे स्तोताओ! उन की स्तुति करो. तुम इंद्र की महिमा का पूर्ण रूप से वर्णन न कर सको और थोड़ा गान कर सकोगे, इस से भी तुम्हे स्वर्ग की प्राप्ति होगी. (१)

EN English Translation

Indra, who is going to take the shape of mortal human beings, O Stotao! Praise them. You cannot fully describe the glory of Indra and will be able to sing a little, this will also give you heaven. (1)

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