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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 65 • Mantra 2

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 65 • मन्त्र 2

20.65.2

Mantra ID: 20.65.2

अगो॑रुधाय ग॒विषे॑ द्यु॒क्षाय॒ दस्म्यं॒ वचः॑ । घृ॒तात्स्वादी॑यो॒ मधु॑नश्च वोचत ॥ (२)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.65.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! इन तेजस्वी, देखने योग्य वाणी रूपी अन्न वाले तथा गायों को न रोकने वाले इंद्र के प्रति शहद और घी से भी अधिक मधुर वाणी का उच्चारण करो. (२)

EN English Translation

O stotao! Pronounce a sweeter voice than honey and ghee towards Indra, who has food in the form of these bright, observable speeches and does not stop cows. (2)

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